May 19, 2021
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प्रकृति की अमूल्य धरोहर हमारी आंखें

प्रकृति की अमूल्य धरोहर है आंखें जिसके द्वारा हम इस संसार में भिन्न-भिन्न तरह की खूबसूरती देख सकते हैं। इनके होने से हम प्रकृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं। समय के साथ चलते चलते इस अमूल्य धरोहर में खानपान व अनुवांशिक कारणों से कुछ दोष आ गए है। इसे कई बीमारियों ने घेर रखा है।एक मुहिम के जरिए किसी सच्चे समाजिक क्रांतिकारी ने अपनी संस्था के जरिए इस अभिशाप से मुक्ति दिलाने की सोची। इस संगठन के जरिए आज तक 27 कैंप लगाए जा चुके हैं । संस्था के कार्यकर्ता उस सामाजिक क्रांतिकारी के कहने पर 10 दिसंबर को हर साल पहुंच जाते हैं। वहाँ पर हजारों लोगों की आंखों की निशुल्क जांच की जाती है। वहाँ जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है, वह भी मुफ्त अगर मरीज़ आपरेशन का खर्च सहने में सक्षम नहीं है। ऑपरेशन के बाद एक मरीज के पास एक स्वयंसेवक होता है जो उसका हर तरीके से ध्यान रखता है। उसके खान-पान से लेकर रफा-हाज तक की जिम्मेवारी उस कार्यकर्ता की होती है।

अब तक हजारों लोगों को यहां से फायदा मिला है और वहां पर आंखों के कोरनिया तक को बदला जाता है और मरीज का पूरा इलाज, खान – पान और रहन-सहन, सबका प्रबन्ध मुफ्त में किया जाता है।

समाज में इस दिशा में काम करने वाले सामाजिक क्रांतिकारी व उसके सामाजिक कार्यकर्ता के बारे में आप जानना नहीं चाहोगे। आखिर वह कौन है जो इस दिशा में इतना बड़ा कार्य कर रहा है? वह है डेरा सच्चा सौदा के मौजूदा गद्दीनशीन संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा जिनकी पावन प्रेरणा के तहत यह कार्य किया जा रहा है। यह शिविर डेरा के दूसरे गद्दी नशीन पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी की पावन स्मृति में लगाया जाता है। ऐसे संत को अरबों- खरबों बार धन्यवाद करते हैं जिनका हर कार्य मानवता भलाई की भावना से ओत प्रोत होता है और जो समाज में ऐसे कार्यों की शुरुआत करके ज़रूरतमंद की सम्भाल करते हैं.